मानव अधिकार! अधिकार और कर्तव्य? Human rights।#human rights#human rights speech#NHRC#videoconference
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-
आज जब विश्व में मानव अधिकारों की बात होती है,तो उसका केंद्र
इन्डिविज्युवल राइट्स होते हैं व्यक्तिगत अधिकार होते हैं।
यह होना भी चाहिए क्योंकि व्यक्ति से ही समाज का निर्माण होता है। और समाज से ही राष्ट्र बनते हैं।
लेकिन भारत और भारत के परंपरा ने
सदियों से इस विचार को एक नई ऊंचाई दी है। हमारे यहां सदियों से शास्त्र में बार बार इस बात का जिक्र किया जाता है।
"आत्मान: पति कु लानि परेशान ना समाचारेत्।"
यानी जोअपने लिए प्रतिकूल हो वो व्यवहार दूसरे किसी भी व्यक्ति के साथ न करें। इसका अर्थ यही है कि मानव अधिकार केवल अधिकारो से नहीं जुड़ा बल्कि हमारे कृतव्यो का विषय भी है।
हम अपने साथ-साथ दूसरों के भी अधिकारों की चिंता करें।
दूसरों के अधिकारों को अपना कर्तव्य बनाएं।
अब हर मानव के साथ समभाव और मम भाव रखें जब समाज में यह सहजता आ जाती है तो मानव अधिकार हमारे समाज का जीवन मूल्य बन जाते हैं।
अधिकार और कर्तव्य ये दो एसी पटरियां है जिन पर मानव विकास और मानव गरिमा की यात्रा आगे बढ़ती हैं। अधिकार जितना आवश्यक है। कर्तव्यभी उतने ही आवश्यक है।
अधिकार और कर्तव्य की बातअलग-अलग नहीं होनी चाहिए एक , साथ ही की जानी चाहिए।
यह हम सभी का अनुभव है। जितना हम कर्तव्य पर बल देते हैं। उतना ही अधिकार सुनिश्चित होता है। इसलिए प्रत्येक भारतवासी अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के साथ हीअपने कर्तव्यों को उतनी ही गंभीरता के साथ निभाए।
इसके लिए भी हम सब ने मिलकर के निरंतर प्रयास करना पड़ेगा। निरंतर प्रेरित करते रहना होगा।

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